Sunday, June 16, 2013

Shri Ganga Mandir Karanwas

श्री गंगा मंदिर :- यह मंदिर माँ कल्याणी वाले तिराहे के निकट स्थित है कर्णवास के परम्परागत उत्सवो मैं श्री रामलला की सवारी रथयात्रा यही से प्रराम्भ होती है मंदिर मैं श्री गंगा जी की भव्य प्रतिमा है । यहाँ भी नित्य पूजा के अतिरिक्त वर्ष के सभी उत्सव उल्लास पूर्वक आयोजित होते है । वर्तमान में इस मंदिर की जिम्मेदारी स्वामी अशोक जी महाराज के हाथो में है । वो यहाँ रहकर मंदिर की सम्पूर्ण व्यवस्था सम्हालते है एवं माँ गंगा की भक्ति में लीन रहते है ।   



Ganga Mandir



Maa Ganga Mandir

Maa Ganga





Pili Kothi Karanwas | Anna Kshetra Pili Kothi Aashram

अन्नक्षेत्र पीली कोठी :- गंगाजी की प्रत्यक्ष गोद मैं स्थित पीली कोठी भी आश्रम ही है यह स्थान आगरा के प्रसिद्ध सेठ जगदीश प्रसाद के पूर्वजो ने बनवाया था यहाँ प्रारंम्भ से ही अन्नक्षेत्र संचालित है यहाँ पहुँचने वाले प्रत्येक व्यक्ति को भोजन प्राप्त होता है वर्तमान मैं यहाँ पैर गलीचा बुनाई प्रशिक्षण केंद्र भी चल रहा है जिसमें निर्मित गलीचे दर्शनीय है यहाँ के निकटवर्ती गाँव के लोगो के लिए आय का भी एक साधन है  ।





Saturday, June 15, 2013

Shri Udiya Baba tapobhumi | Shri Udiya Baba Aashram




  श्री देवत्र्य आदर्श इंटर कॉलेज के सामने स्थित उड़िया बाबा आश्रम वर्तमान मैं सुनसान एवं साधना कक्ष अपने आध्यात्मिक परमाणुओ की अनभूति आज भी दर्शन करते है इस आश्रम मैं कितने अखंड भण्डारो का आयोजन हुआ  है इस की संख्या कौन निर्धारित कर सकता है श्री उड़िया बाबा को अन्नपूर्ण की सिद्धि थी उन्हें वह सिद्धि इसी आश्रम मैं हुई थी बाबा का यह चमत्कार था की उनके भण्डारो मैं कभी किसी भी स्थिति में  किसी भी चीज की कोई कमी नहीं पड़ती थी वर्तमान मैं महाराज श्री का चित्र व् खडाऊं इसी आश्रम मैं प्रतिष्ठित है इनकी पूजा आरती भी प्रातः  और साय को  होती है किन्तु आवस्यकता है इस स्थान को फिर से चेतन्य करने की ।

उड़िया बाबा आश्रम:- 


Shree Udiya Baba Ashram

Udiya Baba Tapobhumi


Saturday, June 8, 2013

Bhuteshwar Mahadev Mandir Karanwas

भूतेश्वर महादेव मंदिर कर्णवास :- माँ कल्याणी मंदिर से लगभग १ मील की दूरी पर ठीक पूर्व में स्थित भगवन भूतेश्वर का प्राचीन मंदिर है । लघु आकर के प्राचीन किले में स्थित इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग सिद्ध शिवलिंग है । अनेक संत महात्माओं ने भूतेश्वर नाम से प्रसिद्द भूतेश्वर भगवान की सिद्ध्मत्ता अवं चमत्कारिक प्रसंगों का उल्लेख अपने ग्रंथो में किया है भक्तो की मान्यता है की भगवन भूतेश्वर से की गयी मनो कामना अवश्य पूर्ण होती है । वर्त्तमान मंदिर के निर्माण  का प्राप्त इतिहास भी बड़ा रोचक है कहा जाता है की आज से लगभग २५० वर्ष पूर्व यह मंदिर इस स्थान पर न होकर गंगा जी के सर्वथा तट पर था वही पक्का घाट था । इस मंदिर के सामने इमली का अति प्राचीन अवं अति विशाल वृक्ष खड़ा है यह भी ४०० वर्ष से कम पुराना नहीं है । इसी वृक्ष के सामने शिव मंदिर था । जो श्री गंगा जी ने कटाव करके अपने में समेट लिया उन दिनों यहाँ एक विरक्त महात्मा श्री रणधीर दास जी निवास करते थे वे आगरा जनपद के रहने वाले थे । यही एकांत में बने इस मंदिर में भगवन शिव की सेवा और गंगा स्नान करते थे मंदिर को गंगा जी में कटते गिरते देखकर उन्होंने भगवन शिव के इस दिव्या शिव लिंग को अपनी धोती से बांध दिया । फिर कर्णवास में आकर लोगो को बुलाकर ले गए और शिवलिंग निकलवाकर रख लिया । बाद में उन्होंने इसी स्थान पर शिव लिंग स्थापित किया फिर अपने आपने आप ककैया ईट पाथकर एवं पकाकर वर्तमान मंदिर का निर्माण कराया ।














मंदिर निर्माण  की शैली भी अपने में विशेष है मंदिर के चारो तरफ स्थित दुर्ग ग्वलिअर के महाराज सिंधिया ने बनवाया था जिसमे संत महात्माओं के निवाश के लिए कुटिया आवास भी चारो और से बनवाए । यहाँ पर समय समय पर बड़े बड़े यज्ञ होते रहे है । यही पर हाथरस के प्रसिद्ध सेठ गणेशी लाल ने यज्ञ करतो की सुविधा के लिए बारहद्वारी यज्ञ शाला का निर्माण करके पुण्य प्राप्त किया । विगत वर्षो तक भगवान भूतेश्वर का यह दुर्ग जीर्ण शीर्ण हो गया था किन्तु भगवान भूतेश्वर की कृपा से मंदिर का विशाल चापूतारा संगमरमर से जटित है । मंदिर भी मरम्मत और रंगरोगन से नया हो गया है । ध्वस्त संत कुटिया पुनः बनायीं जा चुकी है । आशा की जाती है की नष्ट प्राय किला शीघ्र  ही सुशोभित होगा  ।

यहाँ हर वर्ष प्रत्येक शिवरात्रि पर लोग हरिद्वार व  गंगोत्री से गंगा जी का जल लाकर भगवान भूतेश्वर का जलाभिषेक करते है । डिबाई क्षेत्र के वर्तमान विधायक श्री भगवान शर्मा उर्फ़ गुड्डू पंडित  भी यहाँ प्रत्येक वर्ष शिवरात्रि पर भगवान भूतेश्वर महादेव का जलाभिषेक करके पूजा अर्चना करते है भूतेश्वर महादेव की ही कृपा से वे यहाँ से दूसरी बार बहुमत से विधायक चुने गए है ।

" अकाल मृत्यु वो मरे जो काम करे चंडाल का
काल  उसे क्या मार सके जो भक्त हो महाकाल का "
हर हर महादेव | हर हर महादेव | हर हर महादेव